मरचोला, सुंदरबनी में जारी सात दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा कार्यक्रम के चौथे दिन की सभा में गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य कथा व्यास साध्वी भद्राभारती जी ने देशभक्ति के असल मर्म और युवाओं की भूमिका पर प्रेरक प्रवचन दिया। भारती जी ने कहा कि देशभक्ति केवल नारों और प्रतीकों का नारा नहीं है यह एक जीवन पद्धति है जिसमें कर्म विचार और चरित्र का समन्वय मिलता है। उन्होंने चेताया कि देश प्रेम को किसी संकीर्णता के साथ न जोड़ें परम्परागत सम्मान के साथ आधुनिक ज्ञान और वैज्ञानिक चेतना का संगम देश को सशक्त बनाता है।
भद्राभरती जी का मुख्य संदेश युवा वर्ग के लिए था उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है परन्तु यह शक्ति तभी सार्थक बनती है जब उसमें अनुशासन चरित्र और सेवा भाव जुड़ा हो उन्होंने युवाओं को तीन प्रमुख अवश्यताएँ बतायीं प्रथम स्वाध्याय और आधुनिक कौशल में निपुणता दूसरी सामाजिक उत्तरदायित्व और तीसरी राष्ट्रीय चेतना के साथ आत्मगौरव का संतुलन उन्होंने कहा कि देशभक्ति का अर्थ है सामाजिक अन्याय और आराध्यताओं के विरुद्ध आवाज उठाना तथा देश के कमजोर वर्गों के लिये कार्य करना। कथा के दौरान साध्वी जी ने उदाहरण देकर समझाया कि कैसे छोटे छोटे कार्य जैसे स्वच्छता अभियान में भाग लेना वृक्षारोपण सामुदायिक शिक्षा और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन युवा ऊर्जा को राष्ट्रीय उत्थान में बदल सकता है। उन्होंने युवाओं को आवाहन किया कि वे केवल निजी लाभ की ओर न भागें बल्कि सामूहिक कल्याण के लिए योजनाएं बनायें स्टार्टअप उद्यमिता के साथ साथ सामाजिक उद्यमिता को भी बढ़ावा दें। साध्वी जी ने कहा कि देश का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल है और यदि युवा उसे समझकर अपनी तकनीकी और व्यवहारीक दक्षता से जोड़ें तो राष्ट्र एक नए निर्माण के पथ पर अग्रसर होगा कथा में युवाओं ने जोश से शपथ ली कि वे राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभायेंगे। कार्यक्रम को श्री आरती के साथ विराम दिया गया उसके पश्चात सभी संगत ने लंगर भंडारे का प्रसाद प्राप्त किया।
